As creatures aware of our own existence, we human beings have a direct
responsibility for each individual needs to know
जैन धर्म विश्व के सबसे प्राचीन दर्शन या पन्थों में से एक है। यह भारत की श्रमण परम्परा से निकला तथा इसके प्रवर्तक हैं 24 तीर्थंकर, जिनमें प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) तथा अन्तिम व प्रमुख महावीर स्वामी हैं। जैन धर्म की अत्यन्त प्राचीनता करने वाले अनेक उल्लेख साहित्य और विशेषकर पौराणिक साहित्यो में प्रचुर मात्रा में हैं। जैन पन्थ की अत्यन्त प्राचीनता करने वाले अनेक उल्लेख अ-जैन साहित्य और विशेषकर वैदिक साहित्य में प्रचुर मात्रा में हैं। श्वेतांबर व दिगम्बर जैन पन्थ के दो सम्प्रदाय हैं, तथा इनके ग्रन्थ समयसार व तत्वार्थ सूत्र हैं। जैनों के पान्थिक स्थल, जिनालय या मन्दिर कहलाते हैं।
ऐसा संगठित, सशक्त और जागरूक समाज बनाना जो अहिंसा, सत्य, तप, संयम और जैन धर्म के मूल सिद्धांतों पर आधारित हो। हम शिक्षा, सेवा, धार्मिक आस्था, और सामाजिक सौहार्द के माध्यम से एक ऐसी पीढ़ी तैयार करना चाहते हैं जो सांस्कृतिक मूल्यों को संभाले, आधुनिक युग के अनुरूप विकास करे, महिलाओं को समान अवसर दे, और युवाओं को नेतृत्व के लिए प्रेरित करे। हमारा उद्देश्य है – धर्म, सेवा और सहयोग के माध्यम से समाज के प्रत्येक सदस्य के जीवन में आत्मिक और सामाजिक समृद्धि लाना।”
“हमारा उद्देश्य है एक सशक्त, संगठित और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध ओसवाल जैन श्वेताम्बर समाज का निर्माण, जहाँ परम्परा, सेवा, शिक्षा और नैतिक मूल्यों के साथ आधुनिकता का संतुलन हो, और समाज का प्रत्येक सदस्य आत्मविकास, सामाजिक सहयोग और धर्ममूल्य आधारित जीवन की ओर अग्रसर हो।”
जैन धर्म में बताए गए छह आवश्यक दैनिक कर्तव्य, जो आत्मिक शुद्धि, अनुशासन और सही आचरण की ओर मार्गदर्शन करते हैं।
The Islamic Monthly is an independent, based publication that fosters
discussion issues related to the modern world.
The Review of Religions, in print since is one of the longest-running in
comparative religiou magazine. The objective of the magazine to press the teachings of Islam, reflecting its rational nature.
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हमारा उद्देश्य है – धर्म, सेवा और सहयोग के माध्यम से समाज के प्रत्येक सदस्य के जीवन में आत्मिक और सामाजिक समृद्धि लाना।